Parampita Parmatma Kaun Hai? मतलब और सच्चाई।


नमस्कार दोस्तों आपका AnekRoop में फिर से स्वागत है। राजयोग के तीसरे दिन में हम जानेंगे परमपिता परमात्मा के बारे में। परमपिता परमात्मा कौन है , इस शब्द का मतलब क्या होता है। उनका कार्य क्या है ?
वह कैसे दीखते है ? लोग उनको अलग -अलग नामों से क्यों बुलाते है। उनमे कौन -कौन सी शक्ति है ? उनका असल स्वरुप क्या है ? और ढेर सारी बातें जानेंगे परमपिता परमात्मा के बारे में।

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परमपिता परमात्मा कौन है ? मतलब और सच्चाई।

परमपिता -परमात्मा यह 2 अलग -अलग शब्द है। एक है परमपिता और एक है परमात्मा।
परमपिता = (परम =सबसे ऊँचा , पिता )
परमात्मा =(परम =सबसे ऊँचा , आत्मा )

इन दोस्तों शब्दों को आप देखेंगे तो आपको पता पड़ेगा कि ये दोनों शब्द आपस में विपरीत है।
परमपिता = जो कि सभी आत्माओं का पिता है। जितने भी धर्मपिता आये उनके भी वे पिता है। किट ,पशु ,पक्षी सबके वे पिता है। उनकी तुलना आत्माओं से नहीं की जा सकती।

जब किसी से तुलना की जाती है तब परम और कनिस्ट शब्द का इस्तेमाल होता है। और यहां पर परमपिता जन्म -मरण के चक्र में नहीं आते , वे गर्व से जन्म नहीं लेते बाकि जितनी भी आत्माएं है वह गर्व से जन्म लेती है। इसीलिए परमपिता की तुलना बाकि आत्माओं से नहीं की जा सकती।
तो आत्माओं में परम और कनिस्ट परमपिता के लिए लागु नहीं होती है।


वह परमात्मा के लिए लागु होती है। जितनी भी आत्माये है उनमे से एक ऐसी भी आत्मा है जो इस सृष्टि में सबसे ऊँचा पार्ट बजाती है , जिसे लोग सृस्टि के आदि पुरुष भी कहते है। अंग्रेज लोग उसे एडम कहते है , जेनियो में आदिनाथ , मुसलमान उसे आदम कहते है , और हिन्दुओं में उसे आदिदेव शंकर कहते है।

वहीँ परमपिता को सभी धर्मपिता पुकारते है। कोई उसे अल्लाह कहता है , तो कोई उसे Godfather , कोई भगवान कहता है तो कोई उसे ईश्वर कहता है।

मुसलमान लोग एक कहावत कहते है - आदम को खुदा मत कहो ,आदम खुदा नहीं है। लेकिन खुदा के नूर से आदम जुदा नहीं है।
हिन्दू लोग कहते है - गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु , गुरु देवो महेश्वरः। गुरु साक्षात परमब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः।
यानि ब्रह्मा ,विष्णु ,शंकर सब गुरु है ,उनसे भी ऊपर परमब्रह्म है उनको तू नमन कर।तू आदम को नहीं खुदा को नमन कर।

तो बात यहां स्पस्ट हो जाती है कि
परमपिता = GOD ,भगवान ,अल्लाह है।
परमात्मा = आदम ,एडम,आदिदेव शंकर है।

(हिन्दुओं में लोग भगवान और देवी -देवता को एक ही मानते है , लेकिन यह सही नहीं है, जो की साबित हो चूका है वहीँ शिव और शंकर अलग है ये भी बोहोत कम ही लोग जानते है। इन सभी राजों को स्वयं परमपिता-(परमात्मा के द्वारा) आकर बता रहे है। इसीलिए लोग परमपिता और परमात्मा को एक ही समझ लेते है।

परमपिता परमात्मा कैसे दीखते है।

परमपिता = उनका असल स्वरुप निराकार ही है। उनका कोई आकार नहीं है। वह एक चैतन्य शक्ति है (ऊर्जा है ) जो कि इन आँखों से दिखाई नहीं देती है। जब वह किसी में प्रवेश करते है , तब उनके अंदर से जो ज्ञान और vibration निकलते है उससे पता पड़ जाता है कि इसमें भगवान की प्रवेशता है।

वह निराकार है , तो कई लोग निराकार को मानते है , जिसकी यादगार में शिवलिंग में बिंदी भी दिखाते है।
लोग उसकी पूजा करते है , तो कई लोग उसे याद करते है। यह तो है उनका रूप।
उनका रंग सफ़ेद है - सफ़ेद इसलिए क्यूंकि वे शांति, पवित्रता के सागर है (और सफ़ेद रंग शांति का प्रतिक होता है )

तो जैसे आकाश में star तारे दिखाई देते है , वैसा ही परमपिता का स्वरुप है। जिसकी यादगार में सोमनाथ के मंदिर में शिवलिंग के बिच में कोहिनूर का हिरा रखा गया था। मक्का में पत्थर को भगवान का प्रतिक मानकर चूमते है , god is light कहकर अंग्रेज उसे प्रकाश के समान मानते है।

लेकिन ये सब अधूरी पहचान है -पूरी पहचान तब कहेंगे जब हम उनके बताये गए ज्ञान से उन्हें पहचानेंगे। जो की 100 % सच होगी। उनका एक -एक वाक्य पत्थर की लकीर होगी। जो ज्ञान अभी वो परमात्मा शंकर के द्वारा दे रहे है।


परमपिता परमात्मा की शक्तियां।

लोग कहते है कि भगवान की हम इतनी पूजा करते है, रोजा रखते है तो भगवान मेरे सभी दुखों को दूर कर देंगे। लेकिन ऐसा कुछ होता नहीं। महाभारत में एक द्रोपदी को बचाने के लिए भगवान आ गया और यहां अनेक द्रौपदीयां नग्न हो रही तो भगवान क्यों नहीं आते।क्यूंकि ये सब झूठ है।

ऐसा कहना कि भगवान मेरी दुखों को दूर करेगा, भगवान मुझे परीक्षा में पास कराएगा , भगवान मेरी नौकरी लगाएगा , भगवान मेरे लिए अच्छा पति देगा।  ऐसा विश्वास रखना सब झूठ है।

तो फिर उनमे कौन सी शक्तियां है ? वह परमपिता कैसे है ? वह हमें क्या देता है ? और कब देता है ?

वह ज्ञान का सागर है , वह पवित्रता का सागर है ,वह शांति का सागर है। वह त्रिकालदर्शी है ( सभी के भूत ,भविष्य ,वर्तमान को जाननेवाला है ) , उनके पास सभी के दिलों की आवाज पहुँच जाती है।

तो वह हमें ज्ञान देता है , और ऐसा ज्ञान देता है जिससे की हम अपने सभी जन्मो को श्रेष्ठ बना सकते है। वह एक जन्म का वर्षा नहीं देता है , वह पुरे 84 जन्मो का वर्षा देता है। वह इस सृष्टि के अंत में आता है , जब सभी आत्माये दुखी और अशांत हो जाती है। तब वह आकर के सभी आत्माओं को सुख और शांति का वर्षा देती है।

वह विशेष 2 चीजें कहते है - 1. इस ज्ञान को अपने जीवन में धारण करो , इसे अनुभव करो और  2.  मुझे याद करो।
मुझे याद करते -करते तुम मेरे जैसे सुख और शांति के सागर बन जायेंगे और ज्ञान से तुम राजाई के पद को प्राप्त करेंगे।

बाकि भगवान कोई अंधश्रद्धा की बातें नहीं बताते , वह तो प्रकृति पति है इसीलिए वे प्रकृति के किसी भी नियम को नहीं तोड़ते। वह तो सहज राजयोग की बातें बताते है। जो अभी आपको मिल रहा है।


तो भाइयों यह थी परमपिता परमात्मा की जानकारी। मैं उम्मीद करता हूँ कि इस जानकारी से आपके जीवन में परमात्मा के बारे में नजरिया बदलेगा। आप इसे share जरूर करे ताकि और भाइयों तक भी यह जानकारी जाये।
और यदि आपका कोई सवाल या कोई सुझाव है तो हमें comment करके जरूर बताये। और हमारे website को free में Subscribe करे। धन्यवाद।

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