नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है anekroop में . आज हम आपके लिए रामायण की कहानी - संक्षिप्त में लेकर आए हैं .इस कहानी में राम के जन्म से रावण की मृत्यु तक सभी कहानियां है , इस कहानी को सरल हिंदी में , और संक्षिप्त में लिखा गया है ताकि आपको पढने में आसानी से समझ भी आए और ज्यादा समय भी ना लगे.
तो चलिए हम आज रामायण की कहानी को जानते हैं :-
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ramayan ki kahani |
रामायण की संक्षिप्त कथा
भारतवर्ष के प्राचीन ग्रंथों में रामायण सबसे पावन और लोकप्रिय है। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित यह महाकाव्य केवल एक कथा नहीं, बल्कि धर्म, नीति, मर्यादा और आदर्श जीवन का मार्गदर्शन है। इस कथा के नायक भगवान श्रीराम हैं, जिन्हें “मर्यादा पुरुषोत्तम” कहा जाता है। उनकी संपूर्ण जीवन यात्रा त्याग, संयम और धर्मपालन का अद्वितीय उदाहरण है।
राम का जन्म
अयोध्या नगरी में अयोध्यापति महाराज दशरथ राज्य करते थे। दशरथ की तीन रानियाँ थीं – कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा। लंबे समय तक संतान न होने के कारण दशरथ ने ऋष्यश्रृंग मुनि के मार्गदर्शन में पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराया। यज्ञ की आहुति से अग्निदेव ने प्रसाद स्वरूप खीर दी, जिसे तीनों रानियों में बाँटा गया।
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कौशल्या ने खीर ग्रहण की और उनसे भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम का जन्म हुआ।
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कैकेयी से भरत,
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सुमित्रा से लक्ष्मण और शत्रुघ्न।
चारों भाई बड़े ही स्नेह, भाईचारे और मर्यादा से पले-बढ़े।
राम का चरित्र – मर्यादा पुरुषोत्तम
राम का बचपन से ही स्वभाव अद्भुत था। वे विनम्र, सत्यप्रिय, वचन के पक्के और धर्मपालक थे। उन्होंने किसी से ऊँच-नीच का भेदभाव नहीं किया। वे सदैव बड़ों का सम्मान करते और छोटे का स्नेहपूर्वक मार्गदर्शन करते।
उन्होंने अपने जीवन में केवल एक नारी (सीता ) से प्रेम किया , और कभी भी दूसरी नारी के बारे में सोचा तक नहीं .
इसी आदर्श और मर्यादा पालन के कारण उन्हें “मर्यादा पुरुषोत्तम” कहा गया।
विश्वामित्र के साथ वनगमन और ताड़का वध
एक समय महर्षि विश्वामित्र राक्षसों के आतंक से परेशान होकर दशरथ से राम और लक्ष्मण को साथ ले गए। वहीं राम ने ताड़का नामक राक्षसी का वध किया और मुनियों के यज्ञ की रक्षा की। यहीं से राम के पराक्रम की गाथा प्रारंभ हुई।
सीता स्वयंवर
मिथिला के राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के स्वयंवर की घोषणा की। शर्त थी कि जो शिवजी के धनुष को उठाकर चढ़ाएगा, वही सीता से विवाह करेगा।
सभी राजकुमार असफल रहे, परंतु राम ने सहज भाव से धनुष उठाया और उसे तोड़ डाला। इस प्रकार सीता का राम से विवाह हुआ। लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का विवाह भी जनक की अन्य बेटियों से हुआ।
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ramayan ki kahani sita swayamwar |
कैकेयी का वरदान और राम का वनवास
कुछ समय बाद दशरथ ने राम का राज्याभिषेक तय किया। लेकिन कैकेयी को उसकी दासी मंथरा ने भड़काया। कैकेयी ने दशरथ से अपने दो वरदान माँगे –
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भरत को अयोध्या का राजा बनाया जाए।
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राम को 14 वर्ष का वनवास दिया जाए।
महाराज दशरथ वचनबद्ध थे, अतः वे रोते हुए भी राम को वनवास देने को विवश हो गए।
राम ने पिता के वचन को सर्वोपरि मानते हुए राजपाट छोड़ दिया। सीता और लक्ष्मण भी उनके साथ वन जाने को तैयार हो गए। यही राम का सबसे बड़ा मर्यादा का उदाहरण है – कि उन्होंने सिंहासन को त्यागकर धर्म और वचनपालन को चुना।
वनवास का जीवन
राम, सीता और लक्ष्मण वन में कुटिया बनाकर रहने लगे। वे मुनियों की रक्षा करते, राक्षसों का विनाश करते और तपस्वियों का सम्मान करते। वनवास के दौरान अनेक घटनाएँ हुईं –
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शूर्पणखा नामक राक्षसी ने राम से विवाह की इच्छा जताई, पर राम ने उसे ठुकरा दिया। क्रोधित होकर शूर्पणखा ने सीता का अपमान करना चाहा, तब लक्ष्मण ने उसकी नाक काट दी।
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इसी अपमान का बदला लेने के लिए शूर्पणखा ने अपने भाई रावण को भड़काया।
सीता हरण
रावण ने छलपूर्वक योजना बनाई। उसके मामा मारीच ने स्वर्ण मृग का रूप धारण किया और सीता के सामने आया। सीता ने राम से उस मृग को लाने का आग्रह किया।
राम जब उसे पकड़ने गए, तो मारीच ने राम की आवाज में पुकारा – “हा लक्ष्मण, हा सीते!”
सीता चिंतित होकर लक्ष्मण को राम की सहायता हेतु भेजने लगीं। अकेली सीता को देख रावण संन्यासी के वेश में आया, भीख माँगी और फिर बलपूर्वक उन्हें लंका ले गया।
राम का दुःख और सीता की खोज
सीता के वियोग में राम विलाप करने लगे। वन-वन भटकते हुए वे जटायु पक्षी से मिले, जिसने रावण से लड़ते हुए प्राण त्याग दिए। फिर वे सुग्रीव और हनुमान से मिले।
सुग्रीव से मित्रता और वानर सेना
किष्किंधा नगरी के राजा सुग्रीव ने अपने भाई बाली से राजपाट छीना था। राम ने बाली का वध कर सुग्रीव को राज्य दिलाया और मित्रता निभाई।
इसके बाद सुग्रीव ने अपनी वानर सेना को सीता की खोज में भेजा।
हनुमान की लंका यात्रा
हनुमान ने समुद्र लांघकर लंका पहुँचकर सीता जी को अशोक वाटिका में देखा। उन्होंने राम का संदेश दिया और अपनी भक्ति से सीता को सांत्वना दी।
वापस आने से पहले हनुमान ने लंका में भारी उत्पात मचाया और अपनी पूँछ में आग लगाकर लंका जला दी।
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rawan |
राम-रावण युद्ध की तैयारी
राम ने समुद्र तट पर पहुँचकर वानर सेना के साथ पुल (सेतु) का निर्माण कराया। नल-नील ने पत्थरों को जल पर तैराया और सेतु बन गया।
सेना के साथ राम लंका पहुँचे और युद्ध की तैयारी हुई।
राम-रावण युद्ध
युद्ध कई दिनों तक चला। रावण की सेना में मेघनाद, कुम्भकर्ण जैसे महाबली योद्धा थे।
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मेघनाद ने कई बार देवों और वानरों को भयभीत किया, पर अंततः लक्ष्मण ने उसका वध किया।
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कुम्भकर्ण ने भीषण युद्ध किया, पर राम के बाणों से उसका अंत हुआ।
अंततः रावण और राम के बीच घोर युद्ध हुआ। रावण मायावी और शक्तिशाली था, परंतु राम धर्म के पक्षधर थे।
राम ने विभीषण के कहने पर रावण के नाभि में ब्रह्मास्त्र चलाकर रावण का वध किया और धरती को उसके आतंक से मुक्त कराया।
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सीता की अग्नि परीक्षा
युद्ध के बाद राम ने सीता से अपनी पवित्रता सिद्ध करने को कहा। सीता ने अग्नि में प्रवेश किया और अग्निदेव ने उन्हें निर्मल और पवित्र सिद्ध किया।
अयोध्या वापसी
वनवास की अवधि पूरी होने के बाद राम, सीता और लक्ष्मण अयोध्या लौटे। भरत ने उनका स्वागत किया और राम का राज्याभिषेक हुआ।
राम ने प्रजा के लिए न्याय, धर्म और आदर्शों से भरा शासन किया, जिसे रामराज्य कहा जाता है।
राम – मर्यादा पुरुषोत्तम क्यों?
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पिता के वचन को निभाने के लिए राजगद्दी छोड़ दी।
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वनवास के दौरान हर परिस्थिति में धर्म का पालन किया।
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मित्रता में बाली का वध कर सुग्रीव को राज्य दिलाया।
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प्रजा और पत्नी के प्रति समान न्याय रखा।
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सत्य और धर्म के लिए रावण जैसे बलशाली राजा को भी पराजित किया।
राम का पूरा जीवन त्याग, धर्म, न्याय और मर्यादा का प्रतीक है।
उपसंहार
रामायण केवल एक कथा नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शन है।
राम का आदर्श जीवन हमें सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धर्म और सत्य का मार्ग न छोड़ें।
राम और रावण का युद्ध केवल अच्छाई और बुराई का संघर्ष नहीं था, बल्कि यह इस बात का प्रमाण था कि अंततः सत्य की ही विजय होती है।
तो दोस्तों यह थी रामायण की कहानी - संक्षिप्त में . मुझे उम्मीद है की आपको यह कहानी जरूर पसंद आई होगी . यदि आपका कोई सवाल या कोई सुझाव है तो हमें जरूर comment करके बताये .
धन्यवाद .
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