Dukh Door Kare-Behtarin Tarika Aur Upay


आज हरेक मनुष्य को दुःख रूपी रावण सता रही है। चाहे वह अमीर हो या गरीब ,कोई शरीर के रोगों से दुखी है , तो कोई अपने गरीबी से दुखी है।
आज मैं आपको ऐसा तरीका बताऊंगा ,जिससे आपको अपने दुखों से निकलने में मदद मिलेगी।

dukh door kare
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आप खुद सोचिये मनुष्य को दुःख कब होती है ?
कुल 3 प्रकार के दुःख , विशेष प्रधान है।
मानसिक दुःख, शारीरिक दुःख ,धन -संपत्ति का दुःख।
और इन सभी में जो मानसिक दुःख है वह सबसे बड़ा दुःख है।
जिस मनुष्य को मानसिक दुःख सता रही है ,वह मनुष्य जीते -जी ,मृत के समान है। कोई को मनचाहा जीवन साथी ना मिलने पर दुखी होता है , कोई को मनचाहा साथी बिछड़ने पर दुःख होता है।

कोई अपने पाप कर्मो के यादों से दुखी होता है ,तो कोई जीवन में कुछ ना करने पर दुखी होता है। ऐसे लोग हर दिन मरते है। और चाहते हुए भी अपने दुखों को दूर नहीं कर पाते है।


मानसिक दुःख को दूर करने का तरीका। 


जब मनुष्य का मन कमजोर हो जाता है ,तब ऐसे लोगों को इस प्रकार की दुखों का सामना करना पड़ता है। ऐसे लोगों को अपने मन को मजबूत बनाना चाहिए। जिससे उनकी पुरानी यादें समाप्त हो जाये और मन अपने आने वाले कर्मों के ऊपर ध्यान दे।

और मन को नियंत्रण करने का एक ही तरीका है , जो भगवत गीता में कहा गया है -अभ्यासेन तू कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते। 
यानि अभ्यास और वैराग्य इनसे ही मन नियंत्रण में आएगा।
अभ्यास :- इसके लिए आप ध्यान कीजिये , सुबह उठते समय और सोते समय और कभी भी जब आपको मन सताए।
और ध्यान करने का सबसे आसान तरीका है - शिवलिंग के बिंदी को याद करना।  शिवलिंग में जो बिंदी है उनको ध्यान कीजिये।  इससे आपको 2  फायदे होंगे , आपका मन भी नियंत्रण में आएगा और भगवान की याद से आपके सभी पाप भी कट  जायेंगे।

वैराग्य ;- की ये दुनिया सब मोह माया है , सब जाने वाली है ,ये शरीर ,ये शरीर के सम्बन्धी ,सब झूठ है।

जो व्यक्ति इसका अभ्यास करेगा ,वही अपने दुखों को दूर कर पायेगा।


शारीरिक और धन -संपत्ति का दुःख। 
तो ऐसे दुःख तो ,समय के अनुसार बदले जा सकते है। देखा जाये तो शारीरिक दुःख और सम्पति का दुःख भी मानसिक दुःख से जुड़ा हुवा है। यदि आपका मन शक्तिशाली है ,तो शारीरिक दुःख और सम्पति का दुःख आने पर भी आप विचलित नहीं होंगे और हिम्मत और साहस से उसका सामना करेंगे।

और यदि आप ऐसे नहीं कर पा रहे है ,तो जीवन के अंत समय तक भी आपके दुःख ख़त्म होने वाले नहीं है।

और अंत में यही कहना चाहता हूँ :- परमात्म प्यार के सुखदायी झूले में झूलो तो दुःख की लहर आ नहीं सकती।

यदि आपका कोई प्रश्न है या कोई सुझाव है तो हमें जरूर बताये। 
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