Mrityu Ke Baad Manushya Aatma Kis Yoni Me Janm Leti Hai

Mrityu Ke Baad Manushya Aatma Kis Yoni Me Janm Leti Hai


नमस्कार दोस्तों आपका AnekRoop में स्वागत है। आज हम आत्मा के विषय के ऊपर अपने चौथे post के तरफ चलते हैं और ये है कि मृत्यु के बाद आत्मा किस योनि में जन्म लेगी ? ये हम कैसे पता करेंगे ? और यह सवाल भी है कि क्या मृत्यु के बाद आत्मा दूसरे योनि में जन्म लेती है ? यदि लेती है तो कैसे लेती है ?और यदि नहीं लेती है तो क्यों नहीं लेती है ? आज हमारी पूरी जानकारी इसी के ऊपर है तो पढ़ते रहिये और जानते रहिये अपने आत्मा के बारे में।

मृत्यु के बाद मनुष्य आत्मा के जन्म के ऊपर- लोगों का विचार।

हिन्दू धर्म के आज के पंडित मानते हैं कि मनुष्य आत्मा के मृत्यु के बाद वे 84 लाख योनियों में से किसी एक योनि में जन्म लेती है। अब वह किस योनि में जन्म लेगी ये उस आत्मा के कर्मों के ऊपर निर्भर करता है। यदि वो मनुष्य आत्मा जीवन भर लोगों को सुख दिया है तो उसे अच्छे जिव में जन्म मिलेगा।  जैसे - पक्षी  और यदि जीवन भर दूसरों को दुःख दिया होगा तो उसको ख़राब योनि में जन्म लेगा होगा। जैसे - सुवर ,सांप इत्यादि।

कई दूसरे धर्म (मुसलमान ) ऐसे भी मानते हैं कि एक ही जन्म हमें जीने के लिए  मिलता है और मृत्यु के बाद वो मनुष्य आत्मा कब्र दाखिल हो जाती है।
mrityu ke baad manushya aatma ka janm
mrityu ke baad manushya aatma ka janm
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मृत्यु के बाद मनुष्य आत्मा के जन्म के ऊपर प्रश्न।

अब हमने तो धर्मों की बातों को सुन लिया है लेकिन जो प्रश्न सामने आ रहा है वो इन सभी धर्मो को झूठा साबित कर देगी। यह प्रश्न मेरा नहीं है बल्कि दुनिया के सभी लोगों का है , आप अपने अंदर से पूछिए क्या आपके अंदर भी ये प्रश्न आते हैं ?

1.  इतिहास में  और आज भी कई ऐसे लोग हैं जिनको अपने पिछले जन्म के बारे में पता चला है और उन सभी ने अपने पिछले जन्म के बारे में कभी भी ये नहीं कहा कि मैं पिछले जन्म में कोई जानवर था , या कोई पक्षी था। उन सभी ने अपने पिछले जन्म के बारे में अपने को मनुष्य ही कहा है भले उनका लिंग बदल गया है लेकिन उनकी योनि नहीं बदली।
                             उन सभी लोगों की बातों के अनुसार मनुष्य दूसरे योनियों  में जन्म नहीं लेती है और ना  मनुष्य आत्मा सिर्फ एक ही जन्म लेती है. ये दोनों धर्मों की बातें झूठी साबित हो जाती है।



2. यदि मनुष्य आत्मा दूसरे योनियों में जन्म लेती है तो मनुष्य की जनसँख्या कम हो जानी चाहिए और दूसरे योनियों की जनसँख्या ज्यादा हो जानी चाहिए। लेकिन इसके विपरीत ही हो रहा है।
आज बाघ (tiger ) की जनसँख्या कितनी कम हो चुकी है। बड़े-बड़े पक्षी तो बिलकुल लुप्त ही हो चुके हैं।
इसका मतलब ये साफ़ हो जाता है कि मनुष्य आत्मा दूसरे योनियों में जन्म नहीं लेती।

मनुष्य आत्मा हमेशा मनुष्य योनि में ही जन्म लेती है। 

आत्मा एक बीज है। जैसे पेड़ों के बीज होते हैं , जिस पेड़ का बीज होगा उसे रोपन करने पर वह पेड़ उसी बीज का फल देगा। जैसे - आम का बीज होगा तो आम का ही फल देगा , जामुन का बीज होगा तो जामुन का ही फल देगा। वैसे ही आत्मा यदि मनुष्य का बीज है तो मनुष्य में ही जन्म लेगा।

बीज को कभी भी कोई परिवर्तन नहीं कर सकता। बीज में कीटाणु लग सकते हैं लेकिन कोई चाहे कि हम आम के बीज को जामुन का बीज बना दें तो ये मुमकिन नहीं है।

डार्विन theory कहती है कि बंदर हमारे पूर्वज हैं लेकिन वो डार्विन theory भी गलत साबित हो गई। scientist ने भी इस theory को गलत मान लिया है। आज मनुष्यों के पास 2500 सालों की history है। इन 2500 सालों में किसी भी जीव को दूसरे जीव में परिवर्तन होते नहीं देखा गया है। भले ही 2500 सालों में कई जीव लुप्त हो गए लेकिन किसी भी जिव ने दूसरे जिव का रूप नहीं लिया है।


अब बात आ जाती है कि मनुष्य यदि मनुष्य में ही जन्म लेगा तो अपने बुरे कर्मो को कैसे भोगेगा ?
तो इसका जवाब है कि मनुष्य -मनुष्य योनि में ही अपने दुखों को भोगती है। दुःख भोगने के लिए कोई दूसरे योनि में जाने की जरूरत नहीं है। बल्कि मनुष्य योनि में ही आज सबसे ज्यादा दुखी लोग रहते हैं।

जो भी लोग आज पाप कर्म कर रहे हैं तो वे अगले जन्म में जरूर अपाहिज या भिखारी के रूप में जन्म ले सकते हैं। उन्हें दूसरे योनि में जन्म लेना कोई जरूरी नहीं है।
आजकल कई ऐसे कुत्ते भी होते हैं तो मनुष्य से भी अच्छी ज़िन्दगी जीते हैं। तो यहां पर दूसरे योनि के लिए हम बुरा नहीं कह सकते कि दूसरा योनि सिर्फ दुःख भोगने के लिए ही होते हैं।

Science की एक theory भी है :- Newton 's 2nd Law - हरेक action का equal and opposite reaction होता है। ये नियम प्रकृति पे भी लागु होती है और आत्मा पे भी लागु होती है। यदि आप पेड़ों को काटेंगे , वायुमंडल को प्रदूषित करेंगे तो प्रकृति भी आपसे बदला लेगी जिसकी वजह से बाढ़ , जल संकट , मौसम परिवर्तन ,भूकंप जैसे आपदाये आएंगे।
                          वैसे ही यदि आप किसी मनुष्य आत्मा या किसी जिव को दुःख देते हैं तो आपको भी किसी ना किसी रूप में दुःख मिलता है। यही प्रकृति का नियम है।

तो इससे ये साफ़ हो जाता है कि आत्मा एक बीज है बीज का परिवर्तन नहीं किया जा सकता है और उसे अपने दुखों को भोगने के लिए अन्य योनियों में जाने की जरूरत नहीं होती वो मनुष्य योनि में ही अपना हिसाब-किताब चुक्तु कर लेती है।


शास्त्रों में गलती कैसे हुई। 

शास्त्रों में मनुष्य आत्मा के 84 के चक्रों का गायन है।
यानि मनुष्य आत्मा 84 जन्म लेती है। लेकिन पंडितों के अज्ञानता के कारन उन्होंने इसका गलत अर्थ निकाला और 84 चक्र को उन्होंने 84 लाख योनियों में बदल दिया। हमने इसके विषय में पहले ही बात कर ली है कि यदि दूसरे योनियों में आत्माये जन्म लेते तो कोई भी योनि लुप्त नहीं होती और हर योनि में समानता होती। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं होता।

तो दोस्तों ये थी जानकारी कि मनुष्य आत्मा मृत्यु के बाद किस योनि में जन्म लेती है। आपकी राय क्या है हमें comment करके जरूर बताये। क्या आप अपने को किसी योनि में होते सोच सकते हैं ? ये भी comment में बताये।


आप इस post को अपने दोस्तों तक जरूर share करें। इस ज्ञान को सभी लोगों तक पहुंचाए ताकि जो अंधविश्वास लोगों में फेल चुकी है वो दूर हो सके।
अपना महत्वपूर्ण समय देकर इस post को पढ़ने के लिए आपका बोहोत-बोहोत धन्यवाद।