Dukh Kya Hai-Sukh Kya Hai


लोग तो यूँ कहते ही रहते है कि हम दुखी हैं , हमको दुःख है।  या हम सुखी है , हम सुख में है।
तो आज मैं आपको इन्ही 2 विषयों के बारे में बताऊंगा कि सुख और दुःख वास्तव में है क्या ?

dukh kya hai sukh kya hai
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दुःख क्या है ?


दुःख की परिभाषा है :- जो जल्दी दूर नहीं होती है। दुःख को यदि हम विस्तार से समझे ,तो यह वह घडी है , समय है, जो जल्दी नहीं जाती है। यह समय आपको अपने अंदर समेटने लगती है , यानि जब आपको किसी कारन वश दुःख होता है तब आप उसी के बारे में सोचते रहते हैं। और उसी की सोच में , चिंता में ,आपका समय चला जाता है।
तो यदि आपको किसी बात की चिंता है तो दुख है और यदि चिंता नहीं ,तो दुःख भी नहीं है।
दुःख के बारे में और जानकारी के लिए यह पढ़े :-Dukh door Kaise Kare-Tarika aur Upay

दुःख क्या -क्या करता है ?

सबसे पहले तो ये आपके मनोबल को गिराता है ,यानि आपको अंदर से कमज़ोर बनाता है। यह आपको अंदर से तोड़ देता है। जब आपका  कोई काम सफल नहीं होता क्यूंकि कोई काम के  उपर आपका दिल नहीं लगता है।

दुःख से कैसे लड़े ?

ऐसी स्थिति में आप एक कहावत याद रखिये।
"मन के हारे -हार  और मन के जीते -जीत। "


जैसा की मैंने आपको बताया कि दुःख  आपके मनोबल को घटाता है , तो आप मन से दृढ संकल्पी हो जाइये , कि मुझे इसे दूर करना ही है ,और यह कहावत बार -बार याद कीजिये।  यह आपको अंदर से बल देगा ,आपको अंदर से शक्ति , ऊर्जा प्रदान करेगा।

बीती बातें दुःख देती है तो क्या करे ?
ऐसा काम जो आपको नहीं करना चाहिए था ,और जब वह पल याद आता है तो दुःख महसूस होता है।
हाँ ये बात बिलकुल सही है कि दुःख तो होता है। लेकिन अब हम क्या करे कि जो याद हमें दुःख दे रहा है वह सुख देने लगे।

यहाँ परेशानी छोटी सी है कि आपका mindset ,सोचने की शक्ति कैसी है। एक व्यक्ति हमेशा अच्छा सोचता है और एक व्यक्ति हमेशा ख़राब सोचता है।

एक व्यक्ति जब exam में fail होता है तो कहता है अच्छा अगली बार खूब मेहनत करूँगा , जी जान लगा दूंगा।  वह अपने नाकामियों से सीखता है और उसे कामियाब बना देता है।

वहीँ  दूसरे तरह का जो व्यक्ति है वह जब fail होता है तो उसी बात को लेकर के बेठ जाता है -कि अब पापा क्या करेंगे ,दोस्त क्या कहेंगे। और जब ऐसी बातें याद आती है तो फिर उनको दुःख होता है। और वह कुछ गलत भी कर देता  है।

 ऐसा नहीं की वो याद ही नहीं आएगा। वह तो याद आएगा ही उसे आप रोक नहीं सकते। लेकिन आप उसे सुधार सकते है।

यहाँ पर जरूरत है आपके सोच को एक नयी दिशा देने की। जब भी आपको दुःख देने वाली कोई बात याद आये-तो आप उस negative याद को positive याद में change कर दीजिये।

की मैंने कुछ सीखा है -यह मेरे साथ होना जरूरी था। मुझे जीवन को आगे तक जीने के लिए experience मिला है। क्यूंकि जब तक कोई हारता नहीं तबतक वह जीतता भी नहीं है। यही तो जीवन का नियम है। हार के ही तो सीखा जाता है। मैंने इस life के incident से सीखा है।

तो आप अपने अंदर ऐसी ही positive धारणाओं को लाइए और देखिये आपके जीवन में एक अद्भुत change आएगा। जो आपके जीवन को बिलकुल बदल कर रख देगा, कामियाबी की और ले जायेगा ।

सुख क्या है ?
सुख का हरेक चीज दुःख से विपरीत है। यानि जो जल्दी ही बीत जाती है। 
एक मशहूर कहावत है।,,,,,
समय तू जल्दी -जल्दी बीत।
दुःख में तू बिलकुल रूक जाये , सुख में जाये बीत।
ये कैसी तेरी रीत।
समय तू जल्दी -जल्दी बीत।



जिस व्यक्ति को किसी बात की चिंता नहीं तो वह व्यक्ति सुखी है। 

सुख क्या -क्या करता है ?
सुख आपको ऊर्जा प्रदान करता है ,जिससे आप ज्यादा सुख भोगते हैं। आपके अंदर कोई चिंता , फ़िक्र नहीं रहती है। आप बिलकुल मौज में रहते हैं। और फिर आपका समय कब गुजर जाता है आपको पता भी नहीं चलता  है।

* सुख और दुःख जीवन के दो पहलु हैं। इसीलिए इंसान को दुःख आने पर ज्यादा दुखी नहीं हो जाना चाहिए। उसका सामना करना चाहिए। और सुख आने पर भी ज्यादा सुखी नहीं होना चाहिए ,आनंद से उसे जीना चाहिए। यही है स्थितप्रज्ञ व्यक्ति की निशानी।  (श्रीमद्भगवद्गीता )

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