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Sandeep Maheshwari Ab Kya Naya Karne Jaa Rahe Hai ???

Sandeep Maheshwari Ab Kya Naya Karne Jaa Rahe Hai ???

 Namaskar doston aapka anekroop me swagat hai. Iss post me hum Sandeep Maheshwari ke bare me janenge ki wah kya naya karne jaa rahe hai....Main aise post nahi likhta lakin aaj me likh raha hoon kyunki kayi baar aise logon ke bare me likhna chahiye jo aapko sahi raah dikhaye aur jo sabhi logon ke liye bhalayi ka kaam kare..... Aaplog to jante hoge Sandeep Maheshwari aur Vivek Bindra ke bich huwi controversy ke bare me ....

Lakin aapko yah jaan kar aur bhi aascharya hoga ki Sandeep Maheshwari ab kayi anya issues ke bare me bhi youth ko jagruk kar rahe hai....

Wah ab aise topic ko pakad rahe hain jo youth ko barbad kar raha hai ,, yaa jisse high level par fraud ka kaam chal raha hai...

Mujhe khushi hai ki ,,,desh me koi aisa bhi wyakti hai jo youth ko lekar serious hai aur usse sahi raah dikha raha hai...

Sandeep Maheshwari
image source : www.sandeepmaheshwari.com


EXAMPLE -1 

12th fail ek movie aayi thi ,,, jisme dikhaya gaya tha ki kaise ek ladka jo 12th fail rehta hai wah kadi mehnat se upsc ka exam clear kar leta hai.....Lakin uske dark side ko nahi dikhaya gaya ki ,,,,jin logon ka upsc clear nahi hota hai wah kaise depression me chale jaate hai aur unki life kaafi had tak kharab ho jaati hai... Kyunki upsc  ke padhayi se unhe koi bhi skill nahi milti aur naa hi uske basis par unhe kaam milta hai.....

UPSC me selection kewal 0.1 % logon ka hota hai....Baaki ke 99.9 % students berojgaar ho jaate hai aur phir chota mota kaam karna shuru kar dete hai....

Aise me country me high level par unskilled log ho jaate hai jisse desh me tarakki nahi ho paati hai...

Aur aise student apni bhi zindagi ko barbad kar dete hai....

Issiliye mujhe bohot khushi huyi ki aise topic par baat kiya jaa raha hai aur log samajhdaar ho rahe hai...

EXAMPLE - 2 

Kayi Coaching chalane waale bohot jyata fraud karte hai ,,,aapse saal bhar ka fee pahle hi le lete hai aur phir padhayi bohot hi kharab karate hai,,,aise me students phans jaate hai ...wah jab apne paise mangte hai to unhe diye nahi jaate .....diye bhi jaate hain to bohot kam .....isme unki paise aur time dono barbad ho jaate hai....

Issiliye coaching chalane wale se bach kar rahe ...Pahle pata kar le ki coaching chalane wale ki degree kya hai aur wahaan kitne bachon ka selection hoti hai....

Wah promotion ke liye selected bachon ko paise dekar unke tasveer ko apni Ads me lagate hai...Jo ki bohot hi galat hai....

Aise promotions lagbhag sabhi coaching institute karte hai...Main jab 11 th me tha tab bhi ye bohot chalta tha,,mera bhi 6 mahine aise hi barbad ho gaya tha.....Uss coaching institute ka naam tha Sigma Education....Padhayi to uski bohot bekaar ,,,teacher bhi time par class nahi lete the.....Aur fee pahle hi le liya jaata tha....To maine 6 mahine ke baad wah coaching chor diya tha...Isse mera base kamjor ho gaya tha...

Issiliye main aapse kehta hoon ki yadi aap 11 me hai to starting se hi aise coaching institute ko pakde to faltu ka advertisement nahi katta ho ,,, aur monthly fee leta ho,,,,aur unke bare me sabhi students ko jankari ho......

EXAMPLE 3 

MLM companiyan - Mere relation me ek wyakti hai jo networking se jude hai,,,,Pahle wah IMC me the ,,phir usko chor diye ,,,,phir Vestige me gaye ...usko bhi chor diye...aur ab wah kisi dusre company me jude hai...

MLM Companiyon ka moto rahta hai,,,bazaar se paise lena hai,,,5 se 10 logon ko crorepati banana hai aur phir saare paise lekar daba lena hai....

Iska model bohot simple rahta hai,,,Aap dusre logon ko jodiye ,,use company ke bare me bataiye,,,Wah judega phir wah dusron ko jodega,,,aise karte karte aapka graph badhte jayega...aur phir aapki payment bhi dheere dheere badhti jayegi...

Lakin dikkat isme yah aati hai ki product jo aapko market me 10 rupaye me mil jayenge ,,,,wahi product aapko inn companiyon me 50 rupaye me milegi....

Aur dusra dikkat yah hai ki ,,,companiyan kab bhagegi iska koi thikana nahi hai....Jab companiya bhagegi to aapke saare mehnat barbad ho jayenge...aur phir aapko starting se mehnat karni hogi...

Aisi companiyan dikhawe ke liye Cars ka istemaal karti hai....2-4 logon ko wah Car de deti hai....aur phir unko dekhkar bhole bhale log apne paise aur time invest karne lagte hai....

Aap samajh lijiye ki shortcut tarike se aap kabhi bhi kamyag nahi ho sakte,,,Yadi aapko success chahiye to pahle koi skill develop kijiye...

Chahe aap Writing kariye,,,Singing Kariye...Business Kariye...Yaa Phir koi technical degree lijiye jaise...B.tech,,,MBBS etc..

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To doston aaj ke liye itna hi...Mujhe ummid hai ki aapko yah post pasand aayi hogi...

Maine iss post me Sandeep Maheshwari jo kaam kar rahe hai ,,uske bare me bataya hai aur kuch apni bhi example diye hai...Mujhe ummid hai ki aapko yah jankari jaroor pasand aayi hogi...

Ispar aapki kya pratikriya hai hame comment me jaroor bataye....bohot bohot Dhanyawaad.....

......................................

Yah bhi jane :-

Rajyoga Meditation Course Day 1 -आत्मा से जुड़े अद्भुत 6 रहस्य

Rajyoga Meditation Course Day 1 -आत्मा से जुड़े अद्भुत 6 रहस्य

 यह राज योग कोर्स का पहला पोस्ट है जिसमें हम जानेंगे कि आत्मा क्या है? जीवात्मा क्या होता है? आत्मा का रंग रूप क्या होता है? आत्मा दूसरे योनि में जन्म लेती है या नहीं? मृत्यु क्यों होती है? और मृत्यु के बाद आत्मा का क्या होता है? तो चलिए :-Rajyoga Meditation Course Day 1 - आत्मा से जुड़े अद्भुत 6 रहस्य , को समझते है और जानते हैं कि आत्मा क्या होता है ?

इस पोस्ट में हम सभी जानकारी प्रूफ और प्रमाण के साथ देने वाले हैं इसीलिए आप इस पोस्ट को जरूर अंत तक पढ़े ।

aatma


हमारा पहला टॉपिक है की आत्मा क्या है? Rajyoga Meditation Course

आत्मा एक चेतन्य सकती है । यहां पर चैतन्य का मतलब हो गया है जान या प्राण। और शक्ति का मतलब हो गया ऊर्जा। यानी आत्मा एक प्राणमय ऊर्जा है।

लेकिन प्रश्न यह उठता है कि आत्मा एक ऊर्जा क्यों है?

इसका जवाब है कि उर्जा जो होता है जिसे अंग्रेजी में एनर्जी कहते हैं वह कभी खत्म नहीं होता है। energy not be created not be destroyed। यानी एनर्जी को ना हम बना सकते हैं और ना ही खत्म कर सकते हैं, एनर्जी को हम दूसरे फॉर्म में ट्रांसफर कर सकते हैं।

वैसे ही आत्मा को ना हम बना सकते हैं और ना ही उसे खत्म कर सकते हैं इसीलिए आत्मा को अजर अमर अविनाशी कहा गया है यानी जिसका कभी जन्म नहीं हुआ, जिसकी कभी मृत्यु ना हो ,और जिसका नाश ना किया जा सके।

जैसे ,टॉर्च में बैटरी एक ऊर्जा है, मोबाइल में बैटरी एक ऊर्जा है, वैसे ही शरीर में आत्मा एक ऊर्जा है लेकिन दोनों में अंतर यही है कि शरीर में जो ऊर्जा है उसमें प्राण है या आप यह भी कह सकते हैं कि आत्मा एक जीवित ऊर्जा है।

Q,२ अब चलिए जानते हैं कि जीवात्मा क्या है? Rajyoga Meditation Course

Rajyoga Meditation Course - आत्मा से जुड़े अद्भुत 6 रहस्य में सबसे आसान इसको समझना है . चलिए इसको जानते हैं :-

एक होता है जड़ आत्मा और एक होता है चैतन्य आत्मा। जब आत्मा शरीर में ना हो तो उसे कहते हैं जड़ आत्मा वही जब आत्मा शरीर में हो तो उसे कहते हैं चैतन्य आत्मा यानी जीवात्मा।

यानी शरीर और आत्मा के मेल को जीवआत्मा कहा जाता है। जीवात्मा जानी जीवित आत्मा, जो बोल सके चल सके कार्य कर सके ।

जीवात्मा को हम अंग्रेजी में living being भी कहते हैं। यानी जिसमें जान है वह जीवात्मा है।

वही जो जड़ आत्मा है उसमें जान नहीं होता है, हर एक जड़ आत्मा का जीवन धारण करने का अपना अपना समय होता है, जब किसी आत्मा का शरीर धारण करने का समय होता है तो वह परमधाम से नीचे उतरती है और गर्भ धारण कर लेती है और इस प्रकार जीवात्मा का जन्म हो जाता है।

अब चलिए जानते हैं अपने तीसरे टॉपिक के बारे में जो है:-

Q.3 .आत्मा का रंग और रूप क्या है? Rajyoga Meditation Course

आत्मा का रंग होता है सफेद, क्यों सफेद? क्योंकि आत्मा पवित्र है, आत्मा को पवित्रता पसंद है, और पवित्रता को हम सफेद रंग से दिखाते हैं।

वही आत्मा का रूप है ज्योति बिंदु

यानी प्रकाशित बिंदु के समान, जिसे हम सफेद बिंदु भी कह सकते हैं।

आत्मा बिंदु के समान क्यों है? 

क्योंकि आत्मा एक बीज है और बीज बहुत छोटा होता है। आत्मा इतना छोटा बिज है कि उसे हम अपने आंखों से नहीं देख सकते। जिस तरह हम atom को यानी परमाणु को अपने इन आंखों से नहीं देख सकते हैं वैसे ही हम आत्मा को इन आंखों से नहीं देख सकते।

Q.4 हमारा अगला टॉपिक है कि क्या मनुष्य आत्मा दूसरे योनि में जन्म लेती है या नहीं ?

हमने अभी जाना की आत्मा एक बीज है अब आप आम का बीज बोईये तो क्या उसमें जामुन फल मिलेगा? नहीं मिल सकता ।

जिस तरह आम का बीज बोने पर आम का ही वृक्ष होता है

वैसे ही मनुष्य का बीज है तो मनुष्य में ही जन्म मिलता है।

इसका प्रूफ यह है कि बहुत सारे लोग हुए हैं जिन्हें अपने पिछले जन्मों के बारे में पता चला है, और उन सभी ने अपने को पिछले जन्म में मनुष्य ही कहा है।

इससे यह साबित होता है कि मनुष्य की आत्मा है तो मनुष्य में ही जन्म लेगी।

 , अब हमारा जो अगला टॉपिक है वह बहुत ही मजेदार है, 

Q.5 वह यह है कि मृत्यु क्यों होती है? Rajyoga Meditation Course

जब आत्मा की उर्जा कभी खत्म नहीं होती है तो मृत्यु भी नहीं होनी चाहिए,

लेकिन ऐसा नहीं होता है, क्यों ऐसा नहीं होता है ? क्योंकि शरीर का जन्म होता है और शरीर के अंदर मशीन होते हैं . जैसे हर्ट,किडनी ,लीवर इत्यादि यह शरीर के मशीन है।

तो समय बीतने पर यह मशीन खराब हो जाते हैं और आत्मा से उर्जा नहीं ले पाते हैं।

जिस तरह समय बीतने पर मोटर खराब हो जाता है और ड्राइवर लाख कोशिश करे उसे नहीं चला पाता उसी तरह वृद्ध होने पर जब शरीर के मशीन खराब हो जाते हैं तब आत्मा शरीर को नहीं चला पाती इसलिए आत्मा शरीर से निकल जाती है और फिर शरीर को मृत घोषित कर दिया जाता है।

लेकिन अब प्रश्न यह आता है कि आकाले मृत्यु में क्या होता है? जब लोग वृद्ध होने से पहले ही शरीर छोड़ देते हैं? उस समय तो उनके शरीर का मशीन नहीं खराब हुआ रहता है?

देखिए, सभी मृत्यु के केस में एक ही reason है कि शरीर का कोई महत्वपूर्ण मशीन आत्मा से उर्जा लेने में असमर्थ है चाहे कोई रोड एक्सीडेंट से मरे कैंसर से मरे, रोग से मरे या किसी अन्य बीमारी से मरे।

जब एक्सीडेंट होता है तब शरीर के बहुत सारे नस कट जाते हैं इसलिए वे उर्जा नहीं ले पाते ऐसे ही बीमारियों में भी होता है। उस समय आत्मा अत्यधिक दुःख का अनुभव करती है जो की बर्दास्त करने योग्य नहीं होता है , इसीलिए आत्मा शारीर छोड़ देती है .

और मृत्यु का एक और सिद्धांत भी है, कि जिसका जन्म हुआ है उसका मृत्यु निश्चित है.  जिसको बनाया गया है उसका खराब होना निश्चित है चाहे वह मनुष्य हो, पशु हो,पक्षी हो या कोई वस्तु हो फ्रीज हो कूलर हो । हर एक के खराब होने का अपना अपना समय होता है, जैसे कोई बल्ब है तो वह 3 से 5 साल में खराब हो जाती है, फ्रीज है तो वह 20 से 30 साल में खराब हो जाती है, वैसे ही मनुष्य का शरीर है जो 70 से 100 सालों तक खराब हो जाती है।

वही आत्मा कभी खराब नहीं होती.  क्यों खराब नहीं होती? क्योंकि आत्मा कभी बनती ही नहीं है इसलिए वह खराब भी नहीं होती।

,अब चलिए बढ़ते हैं अपने अंतिम टॉपिक पर और वह है

Q.6. कि मृत्यु के बाद आत्मा का क्या होता है? Rajyoga Meditation Course

देखिए यहां पर दो ऑप्शन आते हैं ,पहला की आत्मा नया शरीर ले ले और दूसरा की आत्मा भटके।

जिसकी वृद्धा अवस्था में मृत्यु होती है उनको नया शरीर तुरंत मिल जाता है क्योंकि उनका गर्भ उनके संस्कारों के अनुसार पहले से ही तैयार हुआ रहता है।

वही जिनकी अकाले मृत्यु होती है उनकी आत्मा को तीन से चार महीनों तक भटकना होता है क्योंकि उनका गर्भ नहीं तैयार हुआ रहता है।

लेकिन इसके अलावे कई एक्सेप्शन केस भी होते हैं जिनमें आत्मा शरीर लेने से अच्छा भटकना पसंद करती है।

ऐसा ही एक एग्जांपल हमारे यहां हैं हमारे ब्रह्मा बाबा 1969 में शरीर छोड़ें और 2017 तक वह गुलजार दादी में प्रवेश होकर ज्ञान सुनाते रहे। और अभी तक इन्होंने शरीर धारण नहीं किया है यानी 53 वर्ष हो गए हैं इनकी आत्मा को बिना शरीर लिए।

ऐसी बहुत थोड़ी आत्मा होती है जिनका कोई लक्ष्य होता है या कोई अधूरा कार्य होता है जिसे पूरा किए बगैर यह शरीर लेना पसंद नहीं करते हैं तो कुछ ऐसी भी अनोखी आत्मा होती है जो लंबे समय तक शरीर धारण नहीं करती है।

तो मेरे भाइयों यह था  Rajyoga Meditation Course Day 1- आत्मा से जुड़े अद्भुत 6 रहस्य . आशा करता हूं कि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी, ऐसी ही ज्ञान से संबंधित जानकारी के लिए हमारे वेबसाइट को सब्सक्राइब कर लीजिए फिर मिलते हैं अगले पोस्ट में तब तक के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद, ओम शांति।

 

ब्रह्मा बाबा के 5 महत्वपूर्ण गुण

ब्रह्मा बाबा के 5 महत्वपूर्ण गुण

  

 ओम शांति

 आज मैं आप लोगों को ब्रह्मा बाबा से रूबरू कराने वाला हूं। आज मैं आपलोगों को ब्रह्मा बाबा के 5 महत्वपूर्ण गुण के बारे में बताने वाला हूँ . जो ब्रह्मा बाबा को जानते हैं वह भी और जो ब्रह्मा बाबा को नहीं जानते हैं वह भी इस पोस्ट को जरूर अंत तक पढ़े क्योंकि इस पोस्ट को पढने के बाद आपका जीवन बदलने वाला है।

आप जीवन के किसी भी पड़ाव में हो आप किसी भी क्षेत्र से हो यदि आप ब्रह्मा बाबा के इन पांच गुणों को अपने जीवन में धारण करते हैं तो आपका जीवन सफल होना निश्चित है। सफलता आपका जन्मसिद्ध अधिकार हो जाता है।

brahma baba

 

ब्रह्मा बाबा का पहला गुण है-  (पंक्चुअलिटी) यानी समय का पालन करना

 ब्रह्मा बाबा समय के बहुत पाबंद थे। वह इतने समय के पाबंद थे कि उन्होंने 1936 से 1969 तक 33 वर्ष एक भी क्लास मिस नहीं की। सभी मुरली क्लास रोज और समय पर चलाते थे। यहां तक कि जिस दिन उनका शरीर छूटने वाला था ,उस दिन भी शाम में मुरली क्लास चलाने के बाद ही शरीर छोड़े,  ऐसे रेगुलर और पंक्चुअल थे ब्रह्मा बाबा।

 उनका कहना था-  कि सबसे बड़ा खजाना होता है समय का खजाना ( रुपया पैसा धन दौलत नहीं)  समय।

 समय तुमको परिवर्तन ना करें, तुम समय को परिवर्तन कर दो। यदि तुम समय पर कार्य नहीं करोगे तो समय तुमको परिवर्तन कर देगी ,अमीर से गरीब हो जाओगे और यदि तुम समय पर कार्य करोगे तो तुम समय को परिवर्तन कर दोगे। गरीब से अमीर हो जाओगे ।सफलता मिलनी ही मिलनी है। इसीलिए हर एक कार्य में रेगुलर और पंक्चुअल जरूरी है।

 ब्रह्मा बाबा का दूसरा गुण है:-  सहनशीलता यानी सहन करना

 कोई ब्रह्मा बाबा को गाली देते थे, ब्रह्मा बाबा सहन कर लेते थे। उनको धन्यवाद कह देते थे। पेपर में ब्रह्मा बाबा की ग्लानि होती थी ब्रह्मा बाबा सहन कर लेते थे। सिंध के आश्रम को जला दिया  गया ब्रह्मा बाबा सहन कर  लिए।

 उनका कहना था- निंदा तुम्हारी जो करें मित्र तुम्हारा सो होय। जो आपकी निंदा करता है ग्लानि करता है तो वह आपका मित्र है क्योंकि  कारणे-अकारने वही आपको आगे बढ़ाने में मदद कर रहा है।

 इसको एक उदाहरण से समझते हैं-  आप किसी कार्य को करने में लगे हैं और कोई आपसे कह रहा है कि तुमसे नहीं हो पाएगा तुम मत करो। तो ऐसा कह कर वह क्या कर रहा है? वह आपके अंदर की दृढ़ता शक्ति को बढ़ा रहा है। फिर आप कहते हैं हम तो करके ही रहेंगे देखते हैं हमको कौन रोकता है।

 तो ऐसे ही थे ब्रह्मा  बाबा ,  दृढ़ निश्चय बुद्धि जब पेपर में बाबा की ग्लानि हुई तो बिल्कुल ही शांत हो गए। पेपर द्वारा लोग आश्रम में आने लगे और फिर उन्हें भी ईश्वरीय ज्ञान पाने का सौभाग्य मिला। जो ग्लानि कर रहे थे वही फिर बाबा के बच्चे बन गए। तो ऐसे ही थे ब्रह्मा बाबा, बड़े से बड़े शत्रु को दोस्त बना लेते थे।

ब्रह्मा बाबा का तीसरा  गुण है :- ज्ञान

 जब से ब्रह्मा बाबा के द्वारा मुरलिया चलना शुरू हुआ तब से लोग आश्रमों में स्वयं ही खींचे चले आने लगे।

 मुरली तेरी में जादू-  ऐसा ज्ञान ना आज तक कोई सुना था और ना ही कोई सुना पाएगा ।ऐसा ज्ञान जो दुनिया को बदल कर रख देगी , ऐसा ज्ञान सुनते ही लोग भागे भागे चले आने लगे।

 अलफ को अल्लाह मिला , बे को मिली बादशाही ,आई तार अल्लाह की हुआ रेल कराई। आई तार अल्लाह की यानी जब उनको अल्लाह का, परमात्मा का बुलावा आया । जब उनको पता चला कि मैं परमात्मा का रथ हूं तब उन्होंने अपने को टोटल सरेंडर कर दिया, पूर्ण समर्पण। वह पहले आत्मा बने जो परमात्मा के ऊपर पूर्ण समर्पण होते हैं। तो फिर परमात्मा भी उन पर समर्पण हो जाते हैं और फिर ज्ञान मार्ग की शुरुआत हो जाती है।

 उनका ज्ञान धारणाओं का ज्ञान था। ऐसा नहीं कि रट्टू तोता जैसे  रट लिए, नहीं. उस ज्ञान को उन्होंने अपने जीवन में उतारा। ऐसे  धारणा मूर्त बने कि कोई भी उन्हें देखते थे तो उनको दिव्य रूप दिखाई देता था। वह कहते थे-  कि आज सारी दुनिया अज्ञान अंधेरे में है और यह ज्ञान अंधों की लाठी है यानी यह ज्ञान सभी का सहारा है। जो यह ज्ञान लेता है उसको फिर किसी भी सहारे की जरूरत नहीं पड़ती है।

 वह ज्ञान हमेशा लेते रहते थे वह रोज मुरली चलाते थे और उनका विचार करते रहते थे।

 ऐसे ही जीवन में हमेशा ज्ञान लेते रहना चाहिए कुछ ना कुछ सीखते रहना चाहिए जो ज्ञान लेना बंद कर देता है तो वह जैसे जिंदा मृत के समान बन जाता है।

ब्रह्मा बाबा का चौथा गुण है :- प्यार -स्नेह

 प्यार के मूर्ति थे। कोई उनसे 2 मिनट भी मिलता था तो कहता था कि ब्रह्मा बाबा ने हमें जितना प्यार दिया उतना प्यार किसी ने नहीं दिया। जिस तरह मां अपने बच्चों को पालना देती है उसे सीने से लगा के रखती है वैसी ही पालना ब्रह्मा बाबा सभी बच्चों को देते थे। 

 बाबा  मुर्गियों में कहते थे कि यह ब्रह्मा तुम्हारी मां भी है तो दादा भी है। उन्होंने कभी भी किसी से ऊंची आवाज में बात नहीं की सभी को बच्चे बच्चे कहकर पुकारते थे।

 उनका सभी से आत्मिक  प्रेम था वह कॉपी में लिखते थे कि रमेश भाई आत्मा जगदीश भाई आत्मा ।इस तरह वह सभी को आत्मा समझने का अभ्यास करते थे।  आत्मिक प्यार अंदर का प्यार होता है  ,यह ऐसा प्यार होता है जिसे कोई दूर से भी महसूस कर सकता है और ऐसा ही प्यार ब्रह्मा बाबा अपने सभी बच्चों से करते थे।

ब्रह्मा बाबा का  पांचवा और अंतिम गुण है :- सेवा

वह कहते थे की- सेवा में भी देखो तो मनसा सेवा सर्वश्रेष्ठ सेवा है। ऐसे तो वे सभी तरह के सेवा करते थे लेकिन ज्यादातर वे मनसा सेवा में समय बिताते थे।  वह टहलते -टहलते   मन से सेवा करते रहते थे। अपने हाथों को पीछे करके  टहलते रहते थे चक्कर लगाते रहते थे।

 ब्रह्मा ने अपने संकल्पों से सृष्टि रची? कैसे? तो इसका यही राज है मनसा सेवा।

 यज्ञ प्रमुख होते हुए भी वह हर छोटा मोटा काम करते थे। उनका कहना था कि बच्चे यह  है कर्म योग,  हर छोटे-मोटे कार्य करते हुए परमात्मा को याद किया जा सकता है। उसके लिए अलग से आसन लगाकर बैठने की जरूरत नहीं है।

 वह तीनों ही सेवा में अव्वल थे-

 चाहे मनसा सेवा हो वाचा सेवा हो किसी को ज्ञान सुनाना हो,  करमना सेवा हो -यज्ञ का कोई भी कार्य करना हो। वह सभी में अव्वल थे।

 जब से उन्हें पता चला कि परमात्मा मेरे द्वारा कार्य करा रहा है,  तब से उन्होंने अपना तन मन धन तीनों ही समर्पण कर दिया। जानकारी के लिए बता दूं कि वह हीरो के बहुत बड़े व्यापारी थे यज्ञ में आते ही उन्होंने अपना सारा कमाया हुआ धन यज्ञ की सेवा में लगा दी।

 सिर्फ यही नहीं मरने के बाद भी, शरीर छोड़ने के बाद भी अपनी सर्विस को नहीं भूले। गुलजार दादी में प्रवेश होकर बच्चों को ज्ञान सुनाने लगे। वह करके दिखा दिए जो आज तक किसी ने नहीं किया। मर भी जाए लेकिन जो सोच लिया है वह कर के छोडेंगे। मरने के बाद 50 सालों तक वह गुलजार दादी में प्रवेश होकर ज्ञान सुनाते रहे जिसे हम अव्यक्त वाणी कहते हैं। ऐसा ज्ञान सुनाने लगे कि देश-विदेश सभी जगहों से लोग आने लगे। और आज हर देश में ,हर शहर में ,हर एक गांव में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी आश्रम खुल चुका है। वह कहते थे कि आत्मा कभी मरती नहीं है और यह बात उन्होंने सच साबित करके दिखा दिया है।

 ऐसी आत्मा की तुलना हम किसी से नहीं कर सकते सिर्फ उनसे सीख ले सकते हैं। आप ब्रह्मा बाबा के इन गुणों को अपने जीवन में अवश्य धारण करें आपको सफलता   मिलनी ही मिलनी है। निश्चय बुद्धि विजयंती- यदि आपको अपने कार्य के ऊपर निश्चय है तो विजय होना ही है। और बस आज के लिए इतना ही

 तो दोस्तों यह थी ब्रह्मा बाबा के 5 महत्वपूर्ण गुण . यह पोस्ट आपको कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताये , ब्रह्मा बाबा के ये गुण आपको कैसे लगें यह भी जरूर बताये , और इस पोस्ट को अपने दोस्तों तक जरूर शेयर करें ताकि और लोग ब्रह्मा बाबा के बारे में जान पाए . 

धन्यवाद .

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निबंध लेखन।Hindi Essay Writing

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नमस्कार दोस्तों आपका AnekRoop में स्वागत है। आज हम हिंदी में निबंध लेखन सीखेंगे। निबंध कैसे लिखते हैं  निबंध  लिखने का क्या तरीका होता है। और निबंध के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी जानेंगे।

यदि आप हिंदी में निबंध लिखना चाहते है , तो इस पोस्ट को पढने के बाद आप आसानी से कोई भी निबंध लिख पाएंगे । आपको सिर्फ कुछ ही चीजों का ध्यान रखना है। वह क्या है उसके लिए इस post को जरूर अंत तक पढ़े।

आज हम जानेंगे :-

  1. निबंध क्या है ?
  2. निबंध की परिभाषा क्या होती है ?
  3. निबन्ध का महत्त्व 
  4. निबन्ध के अंग 
  5. निबन्ध के कितने प्रकार होते हैं ?
  6. 'सुसंगठित' (सुन्दर और संगठित  ) निबन्ध कैसे लिखे?
  7. निबन्ध-लेखन करते समय ध्यान रखने योग्य बातें
  8.  निबन्ध कैसे लिखें?
  9. निबंध लेखन :-  सरल हिंदी भाषा में 
  10. निबंध लेखन का उदाहरण 
शरीर क्या है और आत्मा क्या है ?

शरीर क्या है और आत्मा क्या है ?

 शरीर क्या है और आत्मा क्या है 

आज किसी से पूछा जाए कि आप कौन है ? आपका परिचय क्या है ? तो सब अपने नाम और धंधे के बारे में बताने लगेंगे। 


कहेगा मैं रविश कुमार पत्रकार हूँ।  मैं अजय कुमार डॉक्टर हूँ। 
कोई इंजीनियर होगा तो कहेगा मैं इंजीनियर हूँ कोई डॉक्टर होगा तो कहेगा मैं डॉक्टर हूँ। सब अपने नाम और धंधे के बारे में बताने लगेंगे। 


लेकिन फिर उनसे पूछा जाए कि जब आप जन्म लिए थे , तब भी डॉक्टर और इंजीनियर थे क्या ?
जब हम जन्म लेते हैं तब हमारा ना कोई नाम होता है और ना कोई पद होता है। तो हम कौन है ?जो कभी नहीं बदलता , हम जन्म लेते हैं तब भी वही रहते हैं नौजवान में भी वही रहते हैं , बुढ़ापा में भी वही रहते हैं और मृत्यु के बाद भी वही रहते हैं। तो हम कौन हैं ?


बहुतों को समझ में आ गया होगा। हम एक चैतन्य आत्मा हैं।  यानि हम एक प्राण हैं। हम एक शुक्ष्म ज्योतिबिंदु आत्मा हैं। अब कोई कहे क्या प्रूफ हम आत्मा कैसे हैं ?


तो इसको ऐसे समझिये - जब हम कहते हैं मेरा घर ,इसका मतलब मैं अलग हूँ और घर अलग है। मैं घर से अलग एक व्यक्तित्व हूँ। मैं घर में रहता हूँ लेकिन मैं घर नहीं हूँ। 


वैसे ही जब हम कहते हैं मेरा गाँव , तो गाँव अलग है और मैं अलग हूँ। 
फिर कहते हैं मेरा देश , यानि देश अलग है और मैं अलग हूँ। मैं देश में रहता हूँ , मैं देश नहीं हूँ। 


* वैसे ही हम कहते हैं मेरा पैर ,मेरा हाथ , मेरा आँख , मेरा मुख मेरा शरीर यानि मैं शरीर से अलग हूँ। मैं शरीर से अलग एक व्यक्तित्व हूँ। 


शरीर अलग है और मैं अलग हूँ। मैं शरीर में रहता हूँ , लेकिन मैं शरीर नहीं हूँ। मैं आँखों से देखता हूँ , कानों से सुनता हूँ , मुख से बोलता हूँ। तो यहाँ पर स्पष्ट हो रहा है मैं कहने वाला कोई और है और शरीर अलग है। यानि शरीर अलग है और आत्मा अलग है। 


sharir kya hai aur aatma kya hai
आत्मा क्या है 


शरीर और आत्मा में अंतर 


शरीर :- 

शरीर 5 तत्वों से बनता है :- जल ,वायु ,अग्नि ,पृथ्वी और आकाश। 
शरीर में 70 % जल है , वायु से हम स्वांस लेते हैं , अग्नि से भोजन का पाचन होता है जिसे हम जठर अग्नि कहते हैं ,पृथ्वी - हाड मांस का शरीर है और आकाश यानि खाली स्थान शरीर में है। 


आत्मा :- 

वहीँ आत्मा 3 चीजों से मिलकर बनता है। मन -बुद्धि और संस्कार। 
मन विचार करता है , बुद्धि निर्णय लेती है और हम जैसे कर्म करते हैं वैसे हमारे संस्कार बनते हैं। 
मन क्या करता है? विचार करता है यानि सोचता है , जैसे ताजमहल के बारे में किसी ने कहा , तो ताजमहल का दृश्य सामने आ गया। और ताजमहल के बारे में जो भी ज्ञान होगा वो सामने आ जायेगा। 
तो मन दृश्य और ज्ञान के आधार पर विचार करता है। 
फिर है बुद्धि :- बुद्धि निर्णय लेती है कि क्या सही है और क्या गलत है। 


जैसे :- मुझे ताजमहल जाना हो ,तो ट्रैन से हम जाते हैं तो 1000 रुपये खर्च होते हैं वहीँ बस से जाते हैं तो 2000 रुपये खर्च होते हैं। 


तो बुद्धि यहाँ निर्णय लेती है कि ट्रैन से जाना फायदेमंद है या बस से। तो यहां ट्रैन से जाने में 1000 रुपये का फायदा हो रहा है , तो ट्रैन से जाना अच्छा है। तो बुद्धि इस तरह से निर्णय लेती है कि क्या सही है उसके लिए और क्या गलत है।


संस्कार :-
हम जैसे कर्म करते हैं वैसे हमारे संस्कार बनते हैं। अब हम ताजमहल गए देखने , वहाँ देखें कि एक बूढी औरत रोड क्रॉस करना चाह रही है , तो मदद कर दिए , इसका मतलब आपके संस्कार अच्छे हैं ,क्या ? तो मदद करने के संस्कार हैं। 


वैसे ही कोई देख करके भी बैठा है , इसका मतलब उसके संस्कार अच्छे नहीं है। क्या संस्कार है ? तो आलस्य के। 
तो हम जैसे कर्म करते हैं वैसे ही हमारे संस्कार बनते हैं। और जैसे हमारे संस्कार होंगे वैसे ही हमारा हमारा अगला जन्म होगा। कोई बचपन से बोहोत अच्छा गाता है , कोई बचपन से ही विद्वान है , इसका मतलब उसके पिछले जन्म के संस्कार अच्छे हैं। 


तो आत्मा मृत्यु के बाद संस्कार लेकर जाती है ,और उसी के अनुसार उनका नया जन्म होता है। 


आत्मा का सम्बन्ध शरीर के साथ कैसे है ?


यहाँ आत्मा का सम्बन्ध मस्तिष्क से जुड़ा है और मस्तिष्क का सम्बन्ध सारे शरीर में फैले ज्ञान तंतुओं से है। आत्मा में ही पहले संकल्प उठता है और फिर मस्तिष्क तथा तंतुओं द्वारा व्यक्त होता है। आत्मा ही शांति तथा सुख -दुःख का अनुभव करती है  तथा निर्णय करती है और उसी में संस्कार रहते हैं। 


इसका अर्थ यही है कि मन और बुद्धि आत्मा से अलग नहीं है। लेकिन आज आत्मा अपने को भूलकर देह (शरीर ) स्त्री , पुरुष ,बूढ़ा , जवान समझने लगा है। और अपने को शरीर समझना ही सभी दुखों का कारन है। 


शरीर में आत्मा का निवास कहाँ है ?


आत्मा एक चेतन (प्राण ) एवं अविनाशी ज्योतिबिंदु है। जो कि शरीर में भृकुटि में निवास करती है। आत्मा का वास भृकुटि में होने के कारन ही मनुष्य गहराई से सोचते समय यहीं हाथ लगाता है। जब वह कहता है कि मेरे तो भाग्य ही खोटे हैं ,तब भी वह यहीं हाथ लगाता है। 


आत्मा का वास यहां होने के कारन ही भक्त लोगों में यहां ही बिंदी और तिलक लगाने की प्रथा है। 
उदहारण :- मोटर और ड्राइवर 
शरीर को गाडी समझिये और आत्मा को ड्राइवर। जिस तरह ड्राइवर गाडी को चलाता है वैसे ही आत्मा शरीर को चलाती है। ड्राइवर के  बिना गाडी का कोई महत्व नहीं , वैसे ही आत्मा के बिना शरीर का कोई महत्व नहीं। दोनों एक दूसरे के पूरक है। 


इसीलिए परमपिता परमात्मा कहते हैं "आत्मा की पहचान " होने पर ही हम इस शरीर को अच्छे से चला सकते हैं और अपने लक्ष्य तक पहुँच सकते हैं। आत्मा की पहचान होने पर ही लोग स्वयं सुख - शांति में रहते हैं और दूसरों को भी सुख -शांति ही देते हैं। 


ॐ शांति। 


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